Sunday, June 29, 2008

भाग्य से ज्यादा कर्म को स्थान

जी हाँ, ईश्वर एक शक्ति है जो सारे जगत को चलाता है तथा सारे जगत उन्हीं की लीला है। हमें ईश्वर पर श्रद्धा ,विश्वाश रखना चाहिए।
मैं ईश्वर पर विश्वास करता हूँ। पर मैं ईश्वर की पूजा के लिए बह्याडम्बर को नहीं मानता हूँ। बल्कि सच्चे ह्रदय से ईश्वर में विश्वास को मानता हूँ।
किसी भी कार्य में मैं भाग्य से ज्यादा कर्म को स्थान देता हूँ। कितने लोग किसी भी कार्य में ख़ुद कर्म करते नहीं व सिर्फ उसको भाग्य पर छोड़ देते हैं और कार्य सफल न होने पर भाग्य को कोसते हैं यह उचित नहीं है। याद रखनी चाहिए कि जो मेरे भाग्य में है, यदि मैं कर्म न करूँ तो वह भी मुझे नहीं मिलेगा।
यदि मेरा कोई कार्य सफल नहीं हुआ तो हमें ईश्वर या भाग्य को नहीं कोसना चाहिए बल्कि हमें वह कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए कि किस कारण से हम सफल नहीं हो सके।
-- महेश

7 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप के इस विचार से सहमति है।

Arfan said...

Aapne such bat kahi hai.Mein aapke vicharo se sahmat hoon.Ishwar akela hai aur is pure brahmand ko chala raha hai.

Popular India said...

बिना कर्म किये फल के आशा करना तो मुर्खता ही हैं.

aditya dalela said...

aapke vichar se me bilkul ashamat hu.aapne bilkul galat baat kahi hai.aap kitna bhi kerm ker lena aapke baghya me nahi hai to bo cheez nahi milegi.kya aapne kabhi president prtibha patil ka naam suna tha. nahi na kya aap soch sakte the.ki bo president bun sakti hai.kya aapne socha tha ki manmohan prime minister hoge. her koi kah raha tha ki sonia p.m hogi.jiske bhagya me jo likha tha bo mila. her kaphi example hai aise mere pass. so you are fully wrong.

संगीता पुरी said...

आपके विचारों से मैं सहमत हूं !!

संगीता पुरी said...

आदित्‍य दलेला जी का कहना भी सही है .. जो जितना भाग्‍य में लेकर आया है .. उसे उतना तो मिलेगा ही .. पद प्रतिष्‍ठा की बात छोड भी दी जाय .. तो बचपन से हर प्रकार की संपत्ति , आई क्‍यू और स्‍वास्‍थ्‍य .. यहां तक कि माता पिता आदि का सुख होना और न होना इसके प्रत्‍यक्ष उदाहरण हैं .. उसे कर्म करने की कोई आवश्‍यकता नहीं .. पर मेहनत किया जाए तो जितना भाग्‍य में है उसे और बढाया जा सकता है !!

चंदन कुमार झा said...

सुन्दर विचार है आपके.