- पवित्र बनो क्योंकि मैं पवित्र हूँ।
- व्यभिचार, चोरी, नशा, हिंसा, झूठ तजना चाहिए।
- हिंसा -- किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से दुःख या कष्ट देना ही हिंसा है।
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LS-57 / 04101202
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LS-57 / 04101202
---- संतवाणी
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LS-52 / ०४१०१००१
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सबों को ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ
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आप भी इसका इस्तेमाल करें
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गीता में भगवान श्री कृष्ण ने हमें हमेशा अपने कर्म करते रहने की ही शिक्षा दिए हैं। अतः श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को हमें यों ही नहीं बिताना चाहिए बल्कि इस अवसर पर हमें अपने कर्म को करते हुए अन्याय के विरुद्ध लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित होना चाहिए।
जिस सभा में अधर्म से धर्म, असत्य से सत्य, सब सभासदों के देखते हुए मारा जाता है उस सभा में सब मृतक के समान हैं। जानो उनमें कोई भी नहीं जीता।
- स्वामी दयानंद सरस्वती
लोकनिंदा से डरना चाहिए क्योंकि यह डर मनुष्य को बुरे कर्मों से बचाता है। हाँ, यदि लोकनिंदा कर्तव्य के मार्ग में बाधा जाए तो इससे डरना कायरता है।
संतवाणी
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हमें अपने काम से काम, अपने मतलब से मतलब कहने मात्र से काम नहीं चल सकता। ऐसा करने से बुरों का विरोध न हो सकेगा और वे मनमानी करके अपनी दुष्टता बढाते हुए दूसरे लोगों के लिए दिन-दिन अधिक भयंकर होते चलेंगे। उसी प्रकार सज्जनों के कार्यों में प्रोत्साहन या सहयोग न दिया जाय तो वे भी निराश होकर चुप बैठे रहेंगे और उनके कार्यों से अनेकों को जो लाभ हो सकते थे वे न हो सकेंगे।
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
-- भगवान् महावीर